Sunday, January 24, 2010

आइये मिलकर गणतंत्र दिवस मनाएं


26 जनवरी एक ऐसा दिन है जब प्रत्‍येक भारतीय के मन में देश भक्ति की लहर और मातृभूमि के प्रति अपार स्‍नेह भर उठता है। ऐसी अनेक महत्‍वपूर्ण स्‍मृतियां हैं जो इस दिन के साथ जुड़ी हुई है। यही वह दिन है जब जनवरी 1930 में लाहौर ने पंडित जवाहर लाल नेहरु ने तिरंगे को फहराया था और स्‍वतंत्र भारतीय राष्‍ट्रीय कांग्रेस की स्‍थापना की घोषणा की गई थी।
26 जनवरी 1950 वह दिन था जब भारतीय गणतंत्र और इसका संविधान प्रभावी हुए। यही वह दिन था जब 1965 में हिन्‍दी को भारत की राजभाषा घोषित किया गया।

आइये मिलकर इसे मनाएं...........जय हिंद

Wednesday, January 13, 2010

आप सभी को मकर संक्रांति की हृदिक शुभकामनाएं


मकर संक्रांति के दिन संकल्प पूर्वक वेदी या चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर अक्षतों का अष्टदल बनाकर और उसमें सवर्णमय सूर्य भगवान की मूर्ति स्थापित करनी चाहिए। इसके पश्चात पंचोपचार विधि से पूजन करना चाहिए। गंगा स्नान, दाल, चावल और काले तिल का दान बड़ा पुण्य प्रदायी माना गया है। शास्त्रों में मकर संक्रांति में काष्ठ और वस्त्र का विशेष दान का भी विधान वर्णित है। कदाचित ठंड अधिक होने के कारण इसका दान महत्वपूर्ण माना गया है, जिससे कि गरीबों को भी ठंड से बचने के लिए आवश्यक काष्ठ और वस्त्र प्राप्त हो सके। संक्रांति काल के दिन समुद्र, गंगासागर, काशी और तीर्थराज प्रयाग में स्नान का विशेष महत्व है, किंतु जो इन तीर्थो में किसी कारण से नहीं जा सकते हैं, उन्हें गंगा आदि सात पवित्र नदियों का स्मरण कर किसी भी नदी या सरोवर में विधिवत स्नान करने का विधान है, जिससे व्रती को तीर्थस्नान का फल तथा सूर्यलोक की प्राप्ति होती है।
आप सभी को मकर संक्रांति की हृदिक शुभकामनाएं

Saturday, January 9, 2010

निस्वार्थ सेवा ही डॉ. हर्षवर्धन कि दोस्त है



डॉ. हर्षवर्धन को कई बार महसूस हुआ है कि शरीफ लोगों के लिए राजनीति फिट नहीं है। उनका कहना है कि वह फिर भी राजनीति में इसलिए बने हुए हैं, क्योंकि राजनीति में पनप रही बुराइयों के खिलाफ अगर लड़ा नहीं गया तो यहां सिर्फ बुरे लोग ही रह जाएंगे। हर्षवर्धन को भ्रष्टाचार और शहर में अस्त व्यस्त ट्रैफिक दो बड़ी समस्याएं लगती हैं। उनका कहना है कि दोनों ही समस्याओं को हल किया जा सकता है। बशर्ते, इसके लिए खुले दिमाग से सोचा जाए और जो भी तरीके अपनाए जाएं, उनमें जनता के हित का ध्यान रखा जाए। ट्रैफिक की समस्या के लिए पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम को मजबूत किया जाना ही वह ठोस उपाय मानते हैं। इससे लोग खुद ही अपने वाहन सड़क पर लाना बंद कर देंगे। हर्षवर्धन का कहना है कि निस्वार्थ सेवा ही उनकी दोस्त है और गुटबंदी दुश्मन। 15 साल के राजनीतिक करियर में किसी तरह के दाग न लगने को वे अपनी कामयाबी मानते हैं। वह यह भी कहते हैं कि उन्होंने जानबूझकर तो अब तक कोई भूल की ही नहीं।

Tuesday, January 5, 2010

यंग और विकास की बातें करने वाले गडकरी बीजेपी को नई धारा में ले जा सकते हैं


उन्हें न तो राजनीतिक तिकड़म भाती है, न आती है। हर घटना या बात को राजनीतिक चश्मे से देखने की उन्हें आदत भी नहीं है। जी, हां हम बात कर रहे है भाजपा के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन गडकरी की। नितिन गडकरी से घंटे भर बात करो तो उनकी बात में या तो महाराष्ट्र सरकार के विविध घोटालों का जिक्र होता है या विकास के प्लान! हिंदुत्व का जिक्र भी बहुत कम होता है। संघ की दरी लेकर भाजपा के दफ्तर कर का सफर गडकरी के लिए काफी सहेजने वाला रहा है। भले ही राजनीतिक लिहाज से गडकरी को कद्दावर नहीं माना जाता। पर उनकी इसी कोरी छवि ने गडकरी को उस पद पर बिठाया है जिसकी खुद उन्होंने कल्पना नहीं की थी। खाने पीने के शौकीन गडकरी बिल्कुल सीधे और खरे शख्स हैं। जो मन में है वही बात जबान पर होती है, इसीलिए कई बार मुश्किल में आ गए हैं। किसी भी प्लान या घोटाले की बारीकी से जांच करके लंबा चौड़ा प्रेजेंटेशन करने में माहिर है। गडकरी की इमेज विकास से जुड़ी है और ताजा राजनीतिक माहौल में यही उनका यूएसपी साबित हुआ है। यंग और विकास की बातें करने वाले गडकरी बीजेपी को नई धारा में ले जा सकते हैं, क्योंकि वे हिंदुत्व के एजेंडा से कतई जुड़े नहीं हैं। गडकरी की विकास की धुन यंग जनरेशन को पार्टी से जोड़ सकती हैं। परंपरागत मानक के अनुसार, गडकरी जन नेता नहीं हैं। उन्होंने कभी चुनाव नहीं लड़ा। 27 साल से वे विधानपरिषद के सदस्य है। जब प्रमोद महाजन जीवित थे, तब महाराष्ट्र बीजेपी पर उन्हीं का नियंत्रण था। उनके निधन के बाद गोपीनाथ मुंडे सर्वेसर्वा रहे हैं हालांकि गडकरी प्रदेशाध्यक्ष थे। यदि महाराष्ट्र में बीजेपी-शिवसेना की सत्ता आती तो उपमुख्यमंत्री गडकरी नहीं मुंडे ही हो सकते थे। अब गडकरी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बन जाने से मुंडे का पार्टी में वजन कम हो गया है। बहरहाल, अब भारतीय जनता पार्टी की कमान नितिन गडकरी के हाथों में है। 52 वर्षीय गडकरी अब तक के युवतम भाजपा अध्यक्ष हैं, उनके सामने भाजपा के भाग्य उदय की चुनौती है। संगठन में नवीन प्राण फूंकते हुए जिन-जिन मुद्दों और पहलुओं पर साख को आंच आई है, वहां-वहां पुनर्प्रारंभ करना पड़ेगा। भाजपा के कार्यकर्ताओं को संगठन की सर्वोच्चता और महिमा के प्रति आश्वस्त करते हुए नए मुहावरे और यौवन की संघर्षगामी दिशा देनी होगी। वे उन राज्यों व क्षेत्रों में जहां पहले जनसंघ और अब भाजपा का गहरा प्रभाव रहा है, पार्टी के राजनीतिक-सांगठनिक क्षरण को भी रोकना चाहेंगे और कर्नाटक यदि दक्षिण विजय के लिए भाजपा का पहला पड़ाव बना है, तो नए कदम आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और केरल की ओर कितना बढ़ पाएंगे, यह देखना होगा।अब तक के अनुभव के अनुसार, भाजपा के नए अध्यक्ष नितिन गडकरी बहुत धैर्यवान, विनम्र और प्रबल विरोधी के साथ भी दस कदम चलने के स्वभाव वाले नेता हैं। यह राजनीति में बड़ा दुर्लभ, लेकिन महत्त्वपूर्ण गुण माना जाता है। उनका अपना औद्योगिक साम्राज्य है, वे व्यवसाय प्रबंधन में भी सफल रहे हैं। वे देश के एक सुस्थापित नेता है, लेकिन सत्ता का मद उन्हें छू नहीं गया है। महाराष्ट्र में लोकनिर्माण मंत्री रहते उन्होंने प्रदेश को शानदार राजमार्ग-एक्सप्रेस हाईवे, पुल और फ्लाईओवर दिए, जिनसे गुजरने वालों को अनायास गडकरी का नाम ध्यान आता है। महत्त्वपूर्ण बात यह है कि इतना खर्चीला और प्रायः आरोपों से घिरा रहने वाला मंत्रालय संभालने के बावजूद नितिन गडकरी के घोरतम विरोधी भी आज तक उन पर किसी भी प्रकार के आरोप की एक अंगुली भी नहीं उठा सके हैं। बेदाग चरित्र, कठोर संयम और झंझावातों में भी धैर्य से प्रतीक्षा करने का उनका स्वभाव दिल्ली के झंझावात में भी उन्हें अध्यक्ष पद पर टिकाए रखेगा, ऐसा माना जाता है।गडकरी की एक ही पहचान आज तक बनी है, वह है इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने वाले जुझारू नेता की, अब पूरी पार्टी के नए-पुराने नेता कार्यकर्ता उनकी ओर आशा से देख रहे हैं। वे गरीबी और बदहाली से संत्रस्त सामान्य जन के साथ पिथला भाखरी-महाराष्ट्र में बाजरे से बना गरीबों का भोजन- भी उतनी ही मस्ती से खाते हैं। सामान्य जन की सहायता के लिए सक्रिय रहते हैं। बहुत कम लोगों को पता होगा कि उनके घर से कभी कोई जरूरतमंद व्यक्ति निराश नहीं लौटा है। वे अब तक 1500 से अधिक आम ग्रामीणों के हृदय के ऑपरेशन करवा चुके हैं। किसी की शादी में दिक्कत है या किसी की चिकित्सा के लिए पैसा नहीं है, तो गडकरी और उनकी पत्नी कांचन चुपचाप सहायता कर आनंद महसूस करते हैं। श्रीमती कांचन गडकरी भी संघ परिवार से संबंधित है। वह नागपुर महानगर स्थित संस्कार भारती की कार्याध्यक्ष हैं। उनके पिता भी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवक रहे हैं और आपातकाल में जेल भी गए थे।गडकरी की असली ताकत है विचारधारा पर पकड़ और सबको अपना बनाकर उस धारा से जोड़ने की हिम्मत, जिस धारा से जनसंघ का निर्माण हुआ और जिससे अपना संबंध अटूट बनाए रखने के लिए जनता पार्टी से पूर्व जनसंघ के सदस्यों ने अलग हटकर भाजपा बनाना स्वीकार किया, पर विचारधारा से समझौता नहीं किया। गडकरी की आंखों में भारतीय युवाओं को अपने वैचारिक चुंबक से जोड़ने का सपना पल रहा है। वे सूचना प्रौद्योगिकी, विज्ञान और तकनीक के विकास को विचारधारा व वैचारिक निष्ठा का अंग मानते हैं, उससे अलग नहीं। इसलिए चुनाव की हार-जीत या राजनीतिक कसरतों से अलग अगर नितिन गडकरी पार्टी के कार्यकर्ताओं में जोश भर सकें और पार्टी को गुटबाजी रहित संगठन शक्ति का बल दे सकें, तो भारतीय राजनीति में भाजपा का भाग्य उदय कोई ताकत नहीं रोक सकती।ऐसा करना उस राजनीतिक परिदृष्य में अत्यंत आवश्यक हो गया है, जो घरेलू जमींदारों और पारिवारिक सामंतशाही के घुन से ग्रस्त हो चुका है। कोई पार्टी अब्दुल्ला पिता-पुत्र की है, तो कोई मुफ्ती पिता-पुत्री या करुणानिधि पिता-पुत्र। कुछ पार्टियां जयललिता, मायावती और ममता के नाम से जानी जाती हैं, उनकी विचारधारा या कार्यक्रमों की पहचान से नहीं। कांग्रेस में सोनिया और राहुल के अलावा कौन है, जो अंतिम निर्णय करने की क्षमता रखता है, इसलिए भाजपा केवल कुछ नेताओं का जमावड़ा नहीं बल्कि भारत की लोकतांत्रिक राजनीतिक आवश्यकता है, जिसने तपोनिष्ठ कार्यकर्ताओं के बल पर आंतरिक लोकतंत्र और राजनीतिक व्यवहार के संविधान सम्मत रास्ते पर शानदार प्रदर्शन किया है। चुनावी हार तो एक तरफ है, यह किसी पार्टी की राजनीतिक गुणवत्ता की अंतिम कसौटी नहीं हो सकती। जो व्यवहार भाजपा ने एक राजनीतिक दल के रूप में दिखाया है, उसकी तेजस्विता को बचाए रखना ही नहीं, बल्कि उसे शासन के लिए जन स्वीकार्यता का बड़ा पैमाना दिलाना भी भाजपा कार्यकर्ताओं का पहला कर्तव्य है, ताकि नितिन गडकरी के नेतृत्व में संगठन और विचारधारा सफल होती दिखे।

Sunday, January 3, 2010

भारतीय तिब्बत सीमा पुलिस के एक कांस्टेबल की कहानी


भारतीय तिब्बत सीमा पुलिस की बटालियन में एक कांस्टेबल अरूणाचल प्रदेश में तैनात है, जिसकी जून 2009 में छुट्टी पर गांव आने के बाद तबियत खराब हो गई। डाक्टरों ने इलाज करने के बाद बताया कि इसे टीबी हो गई है। चिकित्सकों ने उसे एक वर्ष तक बेड रेस्ट के साथ दवा लेने का सलाह दी। इस संदर्भ में भारतीय तिब्बत सीमा पुलिस के अधिकारियों को सूचना दी गई। मगर न तो उस कांस्टेबल को आज तक मेडिकल ग्राउंड के आधार पर वेतन दिया गया, और न ही छठे वेतन आयोग की रकम दी गई। आज उस कांस्टेबल का परिवार आर्थिक परेशानियों के दौर से गुजर रहा है। वहीं दूसरी तरफ संबंधित कमांडेट द्वारा धमकी भी दी जा रही है, जिससे उस कांस्टेबल का परिवार दोहरी मार झेलने को विवश है। इस संबंध में भारत के गृह मंत्रालय, महानिदेशक भारतीय तिब्बत सीमा पुलिस और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग से भी गुहार लगाई गई है, परंतु बात वही ढ़ाक के तीन पात। अब इससे आगे क्या किया जा सकता है?

Saturday, January 2, 2010

विश्व भोजपुरी दो दिवसीय सम्मेलन 9 जनवरी से


पूर्वाचल एकता मंच भोजपुरी भाषा को आठवीं अनुसूची में शामिल कराने की पुरजोर मांग करते हुए 9 और 10 जनवरी 2010 को दादा देव मेला ग्राउंड, द्वारका, सेक्टर-8, दिल्ली में विश्व भोजपुरी सम्मेलन का आयोजन किया है। दो दिवसीय इस सम्मेलन में देश-विदेश के हजारों भोजपुरी भाषा-भाषी लोग शामिल हो रहे हैं। इसमें भोजपुरी भाषा-साहित्य एवं संगीत के विविध कार्यक्रमों के द्वारा विश्व समुदाय व भारत सरकार का ध्यान इस ओर आकर्षित किया जाएगा। इसके बाद भी इस पर ध्यान नहीं दिया गया तो पूर्वाचल एकता मच अपना संघर्ष और तेज करेगा।
दुनिया के कोने-कोने में भोजपुरी भाषा-भाषी लोगों की संख्या लगभग 20 करोड़ से भी अधिक है। सुप्रसिद्ध विद्वान डा. जार्ज ग्रिमसन ने कहा था कि भोजपुरी जीवट वाले लोगों की भाषा है। वास्तव में भोजपुरी बोलने वाले लोग विश्व में जहां कहीं भी है, अपनी भाषा व संस्कृति के साथ पूरे अनुराग व समर्पित भाव से जुड़े हुए हैं।
यही कारण है कि जहां विश्व की सैकड़ों भाषाएं विलुप्त होने के कगार पर हैं, लेकिन भोजपुरी भाषा न केवल तेजी से फल-फूल रही है, बल्कि इसका साहित्य व सिनेमा अत्यधिक लोकप्रिय व विस्तृत होता जा रहा है।
एक ओर जहां अमेरिका में नौकरियों के लिए आवेदन-पत्र भरने की भाषा के रूप में भोजपुरी को मान्यता मिल चुकी है एवं त्रिानिदाद, मारीशस, सूरिनाम, फिजी आदि अनेक देशों में भोजपुरी का पर्याप्त प्रचार-प्रसार हो रहा है। पंरतु आश्चर्य की बात यह है कि अपने देश में ही भोजपुरी को वह स्थान नहीं प्राप्त हो सका है जिसकी वह हकदार है।
विश्व भोजपुरी सम्मेलन-2010 के कार्यक्रमों की विस्तृत जानकारी देते हुए पूर्वाचल एकता मच के मीडिया प्रभारी संतोष सिन्हा एवं आनन्द प्रकाश ने बताया कि नौ जनवरी 2010, शनिवार को सम्मेलन का उद्घाटन माननीय लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार करेंगी। इस अवसर पर पूर्व केंद्रीय मंत्री जनेश्वर मिश्र मुख्य अतिथि होंगे तथा अध्यक्षता पूर्व सासद प्रभुनाथ सिंह करेंगे।
दैनिक जागरण समाचार पत्र के मुख्य महाप्रबंधक निशिकांत ठाकुर विशिष्ठ अतिथि होंगे। उन्हे पत्रकारिता गौरव सम्मान से भी अलंकृत किया जाएगा। उक्त अवसर पर सासद रघुवंश प्रसाद सिंह, रविशकर प्रसाद, जगदंबिका पाल, राजीव प्रताप रूढ़ी, महाबल मिश्रा, जगदानन्द सिंह, रमेश कुमार, मीना सिंह, पूर्व सासद सज्जन कुमार, विधयक धर्मदेव सोलंकी, मुकेश शर्मा, सत्यप्रकाश राणा आदि अनेक विशिष्ट अतिथिगण जनसमुदाय को संबोधित करेंगे।
भोजपुरी की उपेक्षा पर क्षोभ प्रकट करते हुए पूर्वाचल एकता मंच के अध्यक्ष शिवजी सिंह का कहना है कि भोजपुरी भाषी लोगों के तमाम प्रयासों के बावजूद केंद्र सरकार ने भोजपुरी को संविधान की अष्टम अनुसूची में अब तक शामिल नहीं किया हैं।
सम्मेलन के अगले सत्र में एक साहित्यिक संगोष्ठी का आयोजन होगा, जिसका विषय है-भोजपुरी गद्य साहित्य की विकास-यात्रा। संगोष्ठी का उद्घाटन वरिष्ठ साहित्यकार डा. रामदरश मिश्र करेंगे। दूरदर्शन, दिल्ली में अधिकारी एवं साहित्यकार डा. अमर नाथ अमर मुख्य अतिथि होंगे। वरिष्ठ साहित्यकार डा. रमाशकर श्रीवास्तव संगोष्ठी की अध्यक्षता करेंगे।
इसी सत्र में त्रिनिदाद की स्कालर डा. पेंगी मोहन, मारिशस के सोमदत्त दौलतमन, हीरा जयगोविंद, अंबिका मनवोदे तथा देश-विदेश के विभिन्न हिस्सों से आए हुए विद्वान डा. जयकान्त सिंह जय, डा. शत्रुघ्न सिन्हा, डा. बृजभूषण मिश्रा, डा. जौहर शपिफयाबाढ़ी, डा. जनार्दन सिंह, मनोज श्रीवास्तव, प्रमोद कुमार तिवारी आदि भोजपुरी गद्य साहित्य के विकास पर अपने व्यक्त करेंगे।
साहित्यिक संगोष्ठी के पश्चात भोजपुरी कवि सम्मेलन का आयोजन किया जाएगा। कवि सम्मेलन का उदघाटन वरिष्ठ साहित्यकार डा. केदारनाथ सिंह करेंगे। साहित्यकार गुरूशरण सिंह मुख्य अतिथि होंगे एवं डा. गोरख प्रसाद मस्ताना अध्यक्षता करेंगे। इस कवि सम्मेलन में प्रो. सुभाष यादव, डा. सुनील कुमार पंकज, सुरेश गुप्ता, मनोज भावुक, संतोष सिन्हा, मैनावती देवी, संतोष पटेल, जितेन्द्र वर्मा, सुरेन्द्र राय, गुरुविन्दर सिंह आदि अनेक कविगण काव्यपाठ करेंगे। इसके पश्चात सुप्रसिद्ध रंगकर्मी महेन्द्र प्रसाद सिंह के निर्देशन में लोटकी बाबा के रामलीला भोजपुरी नाटक का मंचन किया जाएगा।
इसी सत्र में सुर-संग्राम के सितारें सास्कृतिक-संध्या भी आयोजित की जाएगी। इसमें विश्व के सर्वप्रथम भोजपुरी चैनल महुआ टी वी के रियलिटी शो सुर-संग्राम के प्रमुख कलाकार मोहन राठौर, आलोक कुमार, आलोक पाण्डेय, अनामिका सिंह, विजेता गोस्वामी, राम आशीष बागी आदि अपने गीत-संगीत प्रस्तुत करेंगे।
सम्मेलन के दूसरे दिन 10 जनवरी रविवार को एक परिचर्चा आयोजित की जाएगी जिसका विषय होगा-दिल्ली के विकास में पूर्वाचलवासियों का योगदान परिचर्चा का उद्घाटन बिहार भवन के एडिशनल कमिश्नर के राम करेंगे। मुख्य अतिथि होंगे बिंदेश्वरी दूबे एवं अध्यक्षता करेंगे, सिवा राम पाण्डेय इस परिचर्चा में दिल्ली के हर कोने से भोजपुरी एवं पूर्वाचल के प्रचारक भाग लेंगे। इस कार्यक्रम में पूर्वाचल एक्सप्रेस के संपादक कुलदीप श्रीवास्तव को भी अलंकृत किया जाएगा।
परिचर्चा के पश्चात भोजपुरी गीत-संगीत का रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया जाएगा। इसमें हिंदी एवं भोजपुरी के सुप्रसिद्ध गायक कुमार शानू, भोजपुरी फिल्मों के सुपरस्टार मनोज तिवारी, हिंदी एवं भोजपुरी फिल्मों के सुप्रसिद्ध कलाकार रविकिशन, प्रख्यात भोजपुरी गायिका मालिनी अवस्थी, शर्मिला पांडेय, तरुण तुफानी, सीमा तिवारी, संगीता यादव और महुआ टीवी के अनेक कलाकार अपने मधुर स्वर से उपस्थित जनसमुदाय का मनोरंजन करेंगे।
इस सास्कृतिक-सत्र में दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित मुख्य अतिथि होंगी। कार्यक्रम की अध्यक्षता करेंगे भोजपुरी समाज के अध्यक्ष अजीत दुबे।
इस अवसर पर सुप्रसिद्ध अभिनेता एवं सासद शत्रुघ्न सिन्हा एवं पी के तिवारी को भोजपुरी गौरव सम्मान एवं इंडियन हािस्पटल के चेयरमैन डा. राजेश सिंह को पूर्वाचल गौरव सम्मान प्रदान किया जाएगा। कार्यक्रम में आर पी एन सिंह मंत्री, भारत सरकार जय प्रकाश अग्रवाल सासद, जगदंबिका पाल सासद, संजय निरूपम सासद, सज्जन कुमार पूर्व सासद, रमेश कुमार सासद आदि अनेक विशिष्ठ अतिथि होगे। (अजीत पाण्डेय , भोजपुरी समाज दिल्ली )

Thursday, December 31, 2009

देश हर तरफ से उन्नति करें और दुनिया भर में अमन-ओ-सकूं कायम हो-


हर गुजरता पल अपने पीछे अनेक कड़वी-मीठी अनुभूतियाँ छोड़ जाता, जो हमारी स्मृतियों में संचित हो जाती हैं। हमें हर गुजरते पल से मोह भी होता है और उसके जाने से राहत भी।
भविष्य हमेशा उम्मीदों और आशाओं से भरा होता है। इस लिए हम हमेशा आने वाले के स्वागत दिल खोल कर करते हैं। तो आइये वर्ष 2010 का स्वागत हम इन आशाओं के साथ करें कि ये वर्ष हम सबके जीवन में सुख-समृधि और शान्ति ले कर आए। देश हर तरफ से उन्नति करें और दुनिया भर में अमन-ओ-सकूं कायम हो-

अजीत पाण्डेय

महासचिव

राजद - दिल्ली